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Raksha Bandhan Manaya Jata hai in Hindi

रक्षाबंधन 2021 कब है, और क्यों मनाया जाता है, इतिहास, कहानी, रक्षाबंधन कैसे बनाया जाता है (Raksha Bandhan kab aur Kyu Manaya Jata hai in Hindi)

रक्षा बंधन क्यों बनाया जाता है ? हिन्दू धर्म में रक्षा बंधन एक प्रमुख त्योहार के रूप में मनाया जाता है बहनों के चेहरों में खुशी की झलक देखने को मिलती है. ये भाई बहन का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है. ये रिश्ता इतना ज्यादा पवित्र होता है की इसका सम्मान पूरी दुनिभर में किया जाता है ये मुख्य रूप से हमारे देश भारत का पवित्र त्योहार है लेकिन लगभग लगभग पूरी दुनिभर में मनाया जाता है.

भाई और बहन की रिश्ता पूरी तरह से अनोखा होती है. जहाँ पूरी दुनिभर में भाई बहन के रिश्ते को इतना सम्मान दिया वैसे भी भारत संस्कृतियों देश माना जाता है. इसलिए  तो इस रिश्ते को एक अलग ही पहचान/महत्व  दिया गया है. इसकी इतनी ज्यादा महत्व/पवित्र  है की इसे एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है. इस त्यौहार में भाई बहन के प्यार को एक परंपरा - विश्वाश और त्रधा  के रूप में मनाया जाता है

इस पर्व रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) को श्रावण माह के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. जो की अक्स अगस्त (August) के महीने में आता है और इस साल 22 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा.

रक्षा बंधन क्या है 

छोटे से शब्दों में  कहे तो भाई बहन का प्यार ही रक्षा बंधन है रक्षा बंधन दो शब्दो से मिल कर बना  है  “रक्षा” और “बंधन” अर्थात बहन अपने भाई के हाथ (कलाई ) में राखी बांध कर ये संदेश देती है की हे भाई आप हमारा साथ कभी मत छोड़ना और साथ ही साथ सदैव  हमारी रक्षा करना  


 

किसी शायर से सही लिखा है -

     इसे समझो ना रेशम की तार भईया 

                मेरे राखी का मतलब है प्यार भईया 

रक्षा बंधन का मतलब क्या है 

रक्षा बंधन का पर्व दो शब्दों  से मिलकर  बना हुआ है, “रक्षा” और “बंधन”. भारतीय संस्कृति अनुसार, रक्षा बंधन का मतलब होता है की “एक ऐसा बंधन जो रक्षा प्रदान करता हो” रक्षा बंधन कहते है. यहाँ पर “रक्षा” का मतलब रक्षा/सुरक्षा  प्रदान करना होता है और “बंधन” का मतलब होता है एक गांठ जो रक्षा का होता है. और बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांध कर अपने भाई से रक्षा करने के लिए वचन/वादा/प्रोमिस   लेती है। रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और लंबी उम्र की दुआ मांगती है। 


रक्षा बंधन का इतिहास - History of Raksha Bandhan in Hindi 

राखी का त्यौहार पुरे भारतवर्ष में काफी हर्ष एवं उल्लाश के साथ मनाया जाता है. यह एक ऐसा त्यौहार है जिसमें सभी वर्ग के लोग इसे मनाते हैं. लेकिन सभी त्योहारों के तरह ही राखी त्यौहार मनाने का भी इतिहास हैं. चलिए ऐसे ही कुछ रक्षा बंधन की कहानी हिंदी में जानते हैं.

पहले तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधी जाती थी.

सदियों से चली आ रही रीति के मुताबिक, बहन भाई को राखी बांधने से पहले प्रकृति की सुरक्षा के लिए तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधती है जिसे वृक्ष-रक्षाबंधन भी कहा जाता है। हालांकि आजकल इसका प्रचलन नही है। राखी सिर्फ बहन अपने भाई को ही नहीं बल्कि वो किसी खास दोस्त को भी राखी बांधती है जिसे वो अपना भाई जैसा समझती है 

Raksha Bandhan 2021: हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और उनके अच्छे स्वास्थ और लंबे जीवन की कामना करती हैं। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन 22 अगस्त को मनाया जाएगा।

यह त्यौहार सदियों से मनाया जाता आ रहा है। आइये हम जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी कुछ धार्मिक और ऐतिहासिक कहानियों के बारे में।

सम्राट Alexander और सम्राट पुरु

राखी त्यौहार के सबसे पुरानी कहानी सन 300 BC में हुई थी. उस समय जब Alexander ने भारत जितने के लिए अपनी पूरी सेना के साथ यहाँ आया था. उस समय भारत में सम्राट पुरु का काफी बोलबाला था. जहाँ Alexander ने कभी किसी से भी नहीं हारा था उन्हें सम्राट पुरु के सेना से लढने में काफी दिक्कत हुई. 

जब Alexander की पत्नी को रक्षा बंधन के बारे में पता चला तब उन्होंने सम्राट पुरु के लिए एक राखी भेजी थी जिससे की वो Alexander को जान से न मार दें. वहीँ पुरु ने भी अपनी बहन का कहना माना और Alexander पर हमला नहीं किया था.

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ की कहानी का कुछ अलग ही महत्व है. ये उस समय की बात है जब राजपूतों को मुस्लमान राजाओं से युद्ध करना पड़ रहा था अपनी राज्य को बचाने के लिए. राखी उस समय भी प्रचलित थी जिसमें भाई अपने बहनों की रक्षा करता है. उस समय चितोर की रानी कर्णावती हुआ करती थी. वो एक विधवा रानी थी.

और ऐसे में गुजरात के सुल्तान बहादुर साह ने उनपर हमला कर दिया. ऐसे में रानी अपने राज्य को बचा सकने में असमर्थ होने लगी. इसपर उन्होंने एक राखी सम्राट हुमायूँ को भेजा उनकी रक्षा करने के लिए. और हुमायूँ ने भी अपनी बहन की रक्षा के हेतु अपनी एक सेना की टुकड़ी चित्तोर भेज दिया. जिससे बाद में बहादुर साह के सेना को पीछे हटना पड़ा था. 

इन्द्रदेव की कहानी

भविस्य पुराण में ये लिखा हुआ है की जब असुरों के राजा बाली ने देवताओं के ऊपर आक्रमण किया था तब देवताओं के राजा इंद्र को काफी छती पहुंची थी.

इस अवस्था को देखकर इंद्र की पत्नी सची से रहा नहीं गया और वो विष्णु जी के करीब गयी इसका समाधान प्राप्त करने के लिए. तब प्रभु विष्णु ने एक धागा सची को प्रदान किया और कहा की वो इस धागे को जाकर अपने पति के कलाई पर बांध दें. और जब उन्होंने ऐसा किया तब इंद्र के हाथों राजा बलि की पराजय हुई.

इसलिए पुराने समय में युद्ध में जाने से पूर्व राजा और उनके सैनिकों के हाथों में उनकी पत्नी और बहनें राखी बांधा करती थी जिससे वो सकुशल घर जीत कर लौट सकें.

भविष्‍य पुराण की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धरती की रक्षा के लिए देवता और असुरों में 12 साल तक युद्ध चला लेकिन देवताओं को विजय नहीं मिली। तब देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र की पत्नी शची को श्राणण शुक्ल की पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर रक्षासूत्र बनाने के लिए कहा। इंद्रणी ने वह रक्षा सूत्र इंद्र की दाहिनी कलाई में बांधा और फिर देवताओं ने असुरों को पराजित कर विजय हासिल की।

वामन अवतार कथा

एक बार भगवान विष्णु असुरों के राजा बलि के दान धर्म से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने बलि से वरदान मांगने के लिए कहा। तब बलि ने उनसे पाताल लोक में बसने का वरदान मांगा। भगवान विष्णु के पाताल लोक चले जाने से माता लक्ष्मी और सभी देवता बहुत चिंतित हुए। तब मां ने लक्ष्मी गरीब स्त्री के वेश में पाताल लोक जाकर बलि को राखी बांधा और भगवान विष्णु को वहां से वापस ले जाने का वचन मांगा। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। तभी से रक्षाबंधन मनया जाता है।

Raksha Bandhan के मुख्य बातें रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता हैवास्तव में रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम को समर्पित त्योहार है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षा बंधन मनाने के पीछे कई कहानियां छिपी हैं 

द्रौपदी और श्रीकृष्‍ण की कथा

महाभारत काल में कृष्ण और द्रोपदी को भाई बहन माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिशुपाल का वध करते समय भगवान कृष्ण की तर्जनी उंगली कट गयी थी। तब द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांधा था। उस दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था। तभी से रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। कृष्ण ने एक भाई का फर्ज निभाते हुए चीर हरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी।

बादशाह हुमायूं और कमर्वती की कथा

रक्षाबंधन पर हुमायूं और रानी कर्मवती की कथा सबसे अधिक याद की जाती है। कहा जाता है कि राणा सांगा की विधवा पत्नी कर्मवती ने हुमांयू को राखी भेजकर चित्तौड़ की रक्षा करने का वचन मांगा था। हुमांयू ने भाई का धर्म निभाते हुए चित्तौड़ पर कभी आक्रमण नहीं किया और चित्तौड़ की रक्षा के लिए उसने बहादुरशाह से भी युद्ध किया

सिकंदर और पुरू की कथा

इतिहास के अनुसार राजा पोरस को सिकंदर की पत्नी ने राखी बांधकर अपने सुहाग की रक्षा का वचन मांगा था। जिसके चलते सिकंदर और पोरस ने रक्षासूत्र की अदला बदली की थी। एक बार युद्ध के दौरान सिकंदर ने पोरस पर हमला किया तो वह रक्षासूत्र देखकर उसे अपना दिया हुआ वचन याद आ गया और उसने पोरस से युद्ध नहीं किया।

1905 का बंग भंग और रविन्द्रनाथ टैगोर: भारत में जिस समय अंग्रेज अपनी सत्ता जमाये रखने के लिए ‘डिवाइड एंड रूल’ की पालिसी अपना रहे थे, उस समय रविंद्रनाथ टैगोर ने लोगों में एकता के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाया. वर्ष 1905 में बंगाल की एकता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार बंगाल को विभाजित तथा हिन्दू और मुस्लिमों में सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश करती रही. इस समय बंगाल में और हिन्दू मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए और देश भर में एकता का सन्देश देने के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने रक्षा बंधन का पर्व मनाना शुरू किया. 

सिखों का इतिहास: 18 वीं शताब्दी के दौरान सिख खालसा आर्मी के अरविन्द सिंह ने राखी नामक एक प्रथा का अविर्भाव किया, जिसके अनुसार सिख किसान अपनी उपज का छोटा सा हिस्सा मुस्लिम आर्मी को देते थे और इसके एवज में मुस्लिम आर्मी उन पर आक्रमण नहीं करते थे. 

महाराजा रणजीत सिंह, जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की, की पत्नी महारानी जिन्दान ने नेपाल के राजा को एक बार राखी भेजी थी. नेपाल के राजा ने हालाँकि उनकी राखी स्वीकार ली किन्तु, नेपाल के हिन्दू राज्य को देने से इनकार कर दिया.

कृष्ण और द्रौपधी की कहानी

लोगों की रक्षा करने के लिए Lord Krishna को दुष्ट राजा शिशुपाल को मारना पड़ा. इस युद्ध के दौरान कृष्ण जी की अंगूठी में गहरी चोट आई थी. जिसे देखकर द्रौपधी ने अपने वस्त्र का उपयोग कर उनकी खून बहने को रोक दिया था.

भगवान कृष्ण को द्रौपधी की इस कार्य से काफी प्रसन्नता हुई और उन्होंने उनके साथ एक भाई बहन का रिश्ता निभाया. वहीं उन्होंने उनसे ये भी वादा किया की समय आने पर वो उनका जरुर से मदद करेंगे.

बहुत वर्षों बाद जब द्रौपधी को कुरु सभा में जुए के खेल में हारना पड़ा तब कौरवों के राजकुमार दुहसासन ने द्रौपधी का चिर हरण करने लगा. इसपर कृष्ण ने द्रौपधी की रक्षा करी थी और उनकी लाज बचायी थी.

महाभारत में राखी का महत्त्व 

भगवान कृष्ण ने युधिस्तिर को ये सलाह दी की महाभारत के लढाई में खुदको और अपने सेना को बचाने के लिए उन्हें राखी का जरुर से उपयोग करना चाहिए युद्ध में जाने से पहले. इसपर माता कुंती ने अपने नाती के हाथों में राखी बांधी थी वहीँ द्रौपधी ने कृष्ण के हाथो पर राखी बांधा था. 

संतोधी माँ की कहानी

भगवान गणेश के दोनों पुत्र सुभ और लाभ इस बात को लेकर परेशान थे की उनकी कोई बहन नहीं है. इसलिए उन्होंने अपने पिता को एक बहन लाने के लिए जिद की. इसपर नारद जी के हस्तक्ष्येप करने पर बाध्य होकर भगवान् गणेश को संतोषी माता को उत्पन्न करना पड़ा अपने शक्ति का उपयोग कर. 

वहीँ ये मौका रक्षा बंधन ही था जब दोनों भाईओं को उनकी बहन प्राप्त हुई.

यम और यमुना की कहानी

एक लोककथा के अनुसार मृत्यु के देवता यम ने करीब 12 वर्षों तक अपने बहन यमुना के पास नहीं गए, इसपर यमुना को काफी दुःख पहुंची. 

बाद में गंगा माता के परामर्श पर यम जी ने अपने बहन के पास जाने का निश्चय किया. अपने भाई के आने से यमुना को काफी खुशी प्राप्त हुई और उन्होंने यम भाई का काफी ख्याल रखा.

इसपर यम काफी प्रसन्न हो गए और कहा की यमुना तुम्हे क्या चाहिए. जिसपर उन्होंने कहा की मुझे आपसे बार बार मिलना है. जिसपर यम ने उनकी इच्छा को पूर्ण भी कर दिया. इससे यमुना हमेशा के लिए अमर हो गयी.

रक्षा बंधन का महत्व

(1)  रक्षाबंधन का महत्व सच में सबसे अलग होता है. ऐसा भाई बहन का प्यार शायद ही आपको कहीं और देखने को मिले किसी दुसरे त्यौहार में. ये परंपरा भारत में काफी प्रचलित है और इसे श्रावन पूर्णिमा के लिए मनाया जाता है.

(2)  यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें की बहन भाई के हाथों में राखी बांधकर उससे अपने रक्षा की कसम लेती है. वहीँ भाई का भी ये कर्तव्य होता है की वो किसी भी परिस्थिति में अपने बहन की रक्षा करे. सच में ऐसा पवित्र पर्व आपको दुनिया में कहीं और देखने को न मिले.

(3)  राखी का त्यौहार श्रावन के महीने में पड़ता है, इस महीने में गर्मी के बाद बारिस हो रही होती है, समुद्र भी शांत होता है और पुर वातावरण भी काफी मनमोहक होता है.

FAQ

Q : राखी 2021 में कितनी तारीख को है ?

Ans : 22 अगस्त

Q : रक्षाबंधन का त्यौहार कब मनाया जाता है ?

Ans : श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन

Q : इस साल राखी बंधने का शुभ मुहूर्त कितने बजे का है ?

Ans : सुबह 6:15 बजे से रात 7:40 बजे तक

Q : रक्षाबंधन का त्यौहार कैसे मनाते हैं ?

Ans : बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती है.

Q : रक्षाबंधन का इतिहास कितने साल पुराना है ?

Ans : इसके पीछे कई कहानियाँ है, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि यह किस साल से शुरू हुआ था.

Q : रक्षाबंधन क्या है ?

Ans. : रक्षाबंधन का भाई बहन का प्यार वाला त्यौहार है इसमें बहन अपने भाई के माथे पर टिका लगा कर उसके हाथ में रक्षाबंधन बांधती है   

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